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💖 "Today's Divine Message" 🌷 "From the Heart of Divya Shakti" ✨ "Aaj ka Prerna Sandesh"

सूर्य का मकर राशि में गोचर 2026: 12 राशियों पर प्रभाव | Surya Makar Gochar Rashifal

🌸 Om Shree Divine Souls 🌸 Welcome to another heart-touching reflection by Divya Shakti ✨ “When faith meets love, healing begins — and every broken heart finds its light again.” 💫 Today’s Divine Message: 🌞 सूर्य मकर गोचर 2026 का महत्व 14 जनवरी 2026 से सूर्य देव मकर राशि में प्रवेश कर रहे हैं। मकर राशि सूर्य के लिए शत्रु राशि मानी जाती है, लेकिन यह गोचर कर्म, अनुशासन, ज़िम्मेदारी और जीवन की वास्तविकता से सामना कराता है। यह समय हमें दिखाता है कि हमने अब तक अपने कर्मों में कितनी ईमानदारी रखी है। यह गोचर खासतौर पर करियर, मान-सम्मान, पिता से संबंध, सरकारी कार्य, पद-प्रतिष्ठा और आत्मसम्मान से जुड़े विषयों को सक्रिय करता है। अब जानते हैं सभी 12 राशियों पर इसका विस्तृत और संतोषजनक प्रभाव👇 ♈ मेष राशि (Aries) सूर्य का यह गोचर आपके कर्म भाव (10वें भाव) में होगा। यह समय आपके करियर के लिए निर्णायक साबित हो सकता है। नौकरी में जिम्मेदारियाँ बढ़ेंगी, लेकिन साथ ही आपकी मेहनत सबके सामने आएगी। जो लोग लंबे समय से प्रमोशन या पहचान का इंतजार कर रहे थे, उन्हें अवसर मिल सकता है। हालांकि अहंकार ...

Posh Putrada Ekadashi 2025: Date, Vrat Vidhi, Katha aur Mahatva in Hindi

🌸 Om Shree Divine Souls 🌸 Welcome to another heart-touching reflection by Divya Shakti
“When faith meets love, healing begins — and every broken heart finds its light again.”
💫 Today’s Divine Message:


पोष पुत्रदा एकादशी 2025: संतान सुख, पारिवारिक शांति और सौभाग्य देने वाला पावन व्रत
पोष पुत्रदा एकादशी हिंदू धर्म की अत्यंत पुण्यदायी एकादशियों में से एक मानी जाती है। यह व्रत विशेष रूप से संतान प्राप्ति, संतान की रक्षा, पारिवारिक सुख और जीवन में स्थिरता के लिए किया जाता है। पौष मास के शुक्ल पक्ष में आने वाली यह एकादशी वर्ष के अंतिम दिनों में आती है, इसलिए इसे पूरे वर्ष के कर्मों की शुद्धि और नए समय की शुभ शुरुआत का अवसर भी माना जाता है।
मान्यता है कि इस दिन श्रद्धा और विश्वास के साथ भगवान विष्णु का पूजन करने से संतान से जुड़े कष्ट, वंश वृद्धि की बाधाएँ और मानसिक अशांति दूर होती है।
पोष पुत्रदा एकादशी 2025 तिथि
पोष पुत्रदा एकादशी का व्रत
बुधवार, 31 दिसंबर 2025 को रखा जाएगा।
पोष पुत्रदा एकादशी का महत्व
यह एकादशी विशेष रूप से उन दंपत्तियों के लिए अत्यंत फलदायी मानी जाती है जो संतान सुख की कामना करते हैं या जिनकी संतान किसी प्रकार के कष्ट से गुजर रही हो। शास्त्रों के अनुसार इस व्रत के प्रभाव से संतान दीर्घायु, स्वस्थ और संस्कारी होती है।
यह व्रत केवल संतान प्राप्ति तक सीमित नहीं है, बल्कि यह पारिवारिक रिश्तों में प्रेम, विश्वास और स्थिरता लाने में भी सहायक माना गया है। जो लोग अपने जीवन में बार-बार भावनात्मक पीड़ा या पारिवारिक तनाव का अनुभव करते हैं, उनके लिए यह एकादशी विशेष कृपा प्रदान करती है।
पोष पुत्रदा एकादशी व्रत विधि
इस दिन प्रातः स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण किए जाते हैं। घर के मंदिर को शुद्ध कर दीपक जलाया जाता है और भगवान विष्णु का ध्यान किया जाता है। पीले फूल, तुलसी दल, फल और नैवेद्य अर्पित कर मन ही मन व्रत का संकल्प लिया जाता है।
दिनभर संयम, शांति और सकारात्मक भाव बनाए रखना इस व्रत का मुख्य भाव माना गया है। जो लोग निर्जल व्रत न रख सकें, वे फलाहार कर सकते हैं। संध्या समय भगवान विष्णु की आरती कर उनके नाम का स्मरण किया जाता है।
पोष पुत्रदा एकादशी व्रत कथा
प्राचीन काल में भद्रावती नामक नगरी में राजा सुकेतुमान और रानी शैव्या राज्य करते थे। उनके जीवन में हर प्रकार का सुख था, परंतु संतान न होने के कारण वे अत्यंत दुखी रहते थे। अनेक यज्ञ, दान और तप के बाद भी उन्हें संतान सुख प्राप्त नहीं हुआ।
एक दिन ऋषियों की सलाह पर उन्होंने पौष शुक्ल एकादशी का विधि-विधान से व्रत किया और पूर्ण श्रद्धा से भगवान विष्णु की आराधना की। इस व्रत के प्रभाव से उन्हें एक तेजस्वी पुत्र की प्राप्ति हुई। तभी से यह एकादशी “पुत्रदा” कहलाने लगी।
इस दिन क्या करना शुभ माना जाता है
भगवान विष्णु का ध्यान और नामस्मरण
तुलसी के पौधे को जल अर्पित करना
संतान सुख के लिए मन से प्रार्थना करना
जरूरतमंदों को भोजन या वस्त्र दान करना
इस दिन क्या नहीं करना चाहिए
क्रोध और कटु वचन
नकारात्मक सोच
किसी का अपमान
तामसिक भोजन
पोष पुत्रदा एकादशी के विशेष उपाय
संतान सुख के लिए तुलसी दल अर्पित कर प्रार्थना करें।
पारिवारिक शांति हेतु घी का दीपक जलाएँ।
मन की पीड़ा के लिए भगवान विष्णु के चरणों में अपने भाव समर्पित करें।
निष्कर्ष
पोष पुत्रदा एकादशी केवल एक व्रत नहीं, बल्कि आशा, विश्वास और नई शुरुआत का प्रतीक है। वर्ष के अंतिम दिनों में आने वाली यह एकादशी सिखाती है कि सच्ची श्रद्धा और समर्पण से जीवन की सबसे बड़ी कमी भी कृपा में बदल सकती है।


🌿Affirmation of the Day:
“I am guided, loved, and supported by the Divine in every moment.”
💖 Gratitude Corner:

Thank you, Universe, for another chance to shine light, love, and hope into the world.


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