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मोक्षदा एकादशी 2025 (मार्गशीर्ष शुक्ल एकादशी) – 1 दिसम्बर 2025 व्रत विधि व कथा
“When faith meets love, healing begins — and every broken heart finds its light again.”💫 Today’s Divine Message:
=== मोक्षदा एकादशी — तारीख और पञ्चांग ===
मोक्षदा एकादशी: 1 दिसम्बर 2025 (सोमवार)
तिथि आरंभ: 30 नवम्बर 2025 रात लगभग 09:29 PM
तिथि समाप्ति: 1 दिसम्बर 2025 शाम लगभग 07:01 PM
(नोट: पारण हमेशा अपने शहर के स्थानीय पंचांग के अनुसार ही करें)
=== मोक्षदा एकादशी का महत्व ===
मोक्षदा एकादशी भगवान विष्णु को समर्पित मोक्ष-दायिनी तिथि है। यह पापों के क्षय, पूर्व कर्मों की शांति, पितृ-तृप्ति और आत्मा की उन्नति के लिए अत्यंत शुभ मानी जाती है।
=== मोक्षदा एकादशी की कथा (संक्षेप) ===
पुराणों में वर्णित है कि एक राजा ने स्वप्न में अपने पिता की आत्मा को पीड़ा में देखा। ऋषि ने समाधान बताया — मोक्षदा एकादशी का व्रत। राजा और रानी ने श्रद्धा से व्रत रखा, और उसके पुण्य से पिता को मोक्ष प्राप्त हुआ। इसी कारण इसे “मोक्ष–दा” अर्थात मोक्ष देने वाली एकादशी कहा जाता है।
=== व्रत विधि — स्टेप बाय स्टेप ===
1) पूर्व तैयारी (एक–दो दिन पहले)
घर और पूजा स्थान की संपूर्ण साफ़–सफ़ाई
विष्णु के लिए पीला/सफेद वस्त्र सजावट
तुलसी, चंदन, दूध, दही, चावल, केसर आदि तैयार करें
2) एकादशी आरंभ (रात/सुबह)
संकल्प लें: “मैं भगवान विष्णु की कृपा हेतु मोक्षदा एकादशी व्रत कर रहा/रही हूँ।”
तामसिक भोजन, नकारात्मक विचार, क्रोध से बचें
3) सुबह का पूजन
स्नान कर घी का दीपक जलाएँ
विष्णु पर फूल, तुलसी चढ़ाएँ
“ॐ नमो भगवते वासुदेवाय” जप करें
विष्णु सहस्रनाम का पाठ अत्यंत शुभ
4) उपवास के प्रकार
निराहार – बिल्कुल भोजन नहीं (स्वास्थ्य ठीक हो तो)
फलाहार – दूध, फल, नारियल पानी
हल्का सात्त्विक व्रत – सिर्फ फल/दूध
(गर्भवती/अस्वस्थ व्यक्ति हल्का व्रत रखें)
5) दिन भर पूजा–भजन
भगवान विष्णु और तुलसी की पूजा
शाम को दीपदान एवं कीर्तन अत्यंत शुभ
6) दान पुण्य
अन्न, वस्त्र, गुड़, फल, भोजन दान
ब्राह्मण/गरीब को भोजन कराना श्रेष्ठ
7) पारण विधि
द्वादशी तिथि के बाद अपने स्थानीय पंचांग अनुसार
दूध/फल/सात्त्विक भोजन से पारण करें
भगवान को धन्यवाद देकर भोजन प्रारंभ करें
=== पूजा सामग्री ===
तुलसी, फूल, चंदन, घी दीपक, फल, दूध, दही, चावल, हल्दी, केसर, धूप, शुद्ध जल।
=== प्रमुख मंत्र ===
ॐ नमो भगवते वासुदेवाय
ॐ नमो नारायणाय
(108 बार जप करें)
=== क्या करें / क्या न करें ===
✔ क्या करें:
स्नान, पूजा, मंत्रजप
तुलसी सेवा
दान पुण्य
शांत, सात्त्विक व्यवहार
✘ क्या न करें:
मांस, शराब, प्याज-लहसुन
क्रोध, झूठ, अनावश्यक विवाद
किसी को अपमानित करना
=== मोक्षदा एकादशी के लाभ ===
पापों का क्षय
पितृ-तृप्ति
आत्मिक शांति
जीवन में सकारात्मकता
मोक्षमार्ग में प्रगति
घर में सुख-समृद्धि
=== FAQ ===
Q: क्या महिलाएँ और बुजुर्ग व्रत कर सकते हैं?
हाँ, स्वास्थ्य अनुसार फलाहार कर सकते हैं।
Q: पारण कैसे जानें?
हमेशा स्थानीय पंचांग का समय मान
आप मोक्षदा एकादशी कैसे मनाते हैं? अपने अनुभव कमेंट में जरूर लिखें — आपकी बातें किसी और के लिए प्रेरणा बनेंगी। ❤️
“I am guided, loved, and supported by the Divine in every moment.”💖 Gratitude Corner:
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